कांग्रेस वैभव गेहलोत को जालोर से मैदान में उतारती है तो कांग्रेस के कई स्थानीय दावेदारों के अरमानो पर फिर सकता है पानी

खास खबर राजस्थान 09.03.2019

तीन लोकसभा चुनाव में लगातार हार के बाद कांग्रेस खुद यह मान रही है कि न तो हमारे पास स्थानीय मुद्दे थे और न स्थानीय नेता! आप आश्चर्य न करें, पूर्व के विधानसभा चुनावो में जालोर सिरोही से कांग्रेस को आठ में से सिर्फ एक सीट मिली है अब कांग्रेस एक बार फिर पैराशूटी नेताओं को मैदान में लाना चाहती है लेकिन स्थानीय कांग्रेस का यह मानना है कि जब तक स्थानीय नेतृत्व और स्थानीय उम्मीदवारों को प्रमोट नहीं किया जाएगा, चुनाव जीतना मुश्किल होगा!

बूटासिंह के बाद स्थानीय जनता ने कांग्रेस से नाता तोडा उसके बाद थोपे गए पैराशूटी नेताओं को जनता नकारा जो तीन लोकसभा चुनावो से उम्मीदवार और मुद्दे को कांग्रेस की हार का कारण माना जा सकता है ।तीन लोकसभा चुनावो में मिली हार के बाद से कांग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ताओ का कहना है की जीतने के बाद जनता के रूझान से पता चलता है कि उसने न सिर्फ पार्टी देखा है, बल्कि उम्मीदवारों के व्यक्तित्व को भी देखा है। किसने काम किया है, उसे जिताया है और जिसने काम नहीं किया है उसे बाहर कर दिया है।

कांग्रेस कार्यकर्ताओ का कहना हे की हमारे राष्ट्रीय नेतृत्व को समझना चाहिए कि कोई स्थानीय नेता ही स्थानीय मुद्दे को सही ढंग से जनता के समक्ष रख सकता है। पिछले लोकसभा चुनावों में बाहरी व्यक्तियों को भी उम्मीदवार बनाया गया, जिसका खामियाजा पार्टी को उठाना प़ड़ा।

अब तक यह जता चुके है दावेदारी : कांग्रेस जिलाध्यक्ष डॉ समरजीतसिंह, पूर्व विधायक रानीवाड़ा रतन देवासी, पूर्व विधायक सांचौर हीरालाल बिश्नोई, सवाराम पटेल आहोर, जिला परिषद सदस्य जयंती बिश्नोई, हीराभाई देसाई, पूर्व प्रधान शमशेरअली सांचौर इन्होने अपनी दावेदारी जताई है।

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