मंत्री बनते ही बदल गए भरतपुर ‘महाराज’ के सुर

खास खबर राजस्थान 03 फरवरी 2019

विधानसभा चुनाव से पहले खुले तौर पर मुख्यमंत्री के नाम, पार्टी और संगठन के कामकाज पर सवाल उठाने वाले भरतपुर राजघराने के वंशज और डीग कुम्हेर से कांग्रेस ​विधायक और मंत्री ​विश्वेंद्र सिंह के तेवर अब बदले—बदले से नजर आ रहे हैं.

चुनाव में उतरने से पहले नेतृत्व के सवाल को लेकर मुखर रहे विश्वेंद्र ​सिंह का सरकार बनने के बाद अब कह रहे हैं, ‘पहले मैंने क्या बोला उस बात को छोड देना चाहिए. मैं अब कांग्रेस सरकार में मंत्री हूं और हर बयान या शब्द सोच समझकर बोलता हूं.’ दरअसल, चुनाव से पहले विश्वेंद्र सिंह खुलकर सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने के समर्थन में आए थे.

इतना ही नहीं एक समय तो पीसीसी की बैठक में उन्होंने पायलट के समर्थन में पार्टी नेताओं कार्यकर्ताओं के हाथ भी उठवा दिए थे.  लेकिन, ये बात और है कि उनके उस समय के बयानों में अशोक गहलोत का विरोध प्रत्यक्ष तौर पर नजर नहीं आता था. अपनी इसी खूबी के चलते कांग्रेस के बहुमत में आने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा में हुई देरी को लेकर सिक्का उछालकर नाम तय करने वाला बयान भी दिया था. जिसमें वो पायलट और गहलोत गुटों से खुद को दूर दिखाने की कोशिश कर रहे थे.

राजनीति पर नजर रखने वाले लोग ऐसा मानते हैं कि जैसे ही उन्हें आभास हुआ कि सीएम की रेस में पायलट पिछड़ गए हैं तो वे गहलोत के करीब तो नहीं आए पर पायलट से दूर जरूर हो गए. इस दूरी का फायदा उनको सरकार बनने के बाद मिला भी और वे मंत्री भी बने. ऐसे में समझा जा सकता है कि विश्वेंद्र सिंह का रुझान अब ​किस तरफ है और उनके सुर क्यों बदले हुए नजर आ रहे हैं.

विश्वेंद्र के ये बदले बयान एक इंटरव्यू में भी ​दिखे, जिसमें वो डबल इंजन की सरकार, मंत्री पद, पार्टी पहले हुए विवाद, सवर्ण आरक्षण समेत कई मसलों पर सधी हुई बातचीत करते नजर आए. इस बातचीत में उन्होंने कहा कि मंडल कमीशन लागू होने के बाद मैं पहला व्यक्ति था जिसने आर्थिक रूप से पिछ़ड़े वर्गों को भी आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए.

वहीं जाट आरक्षण को लेकर पिछली सरकार में दर्ज हुए मुकदमों में पर भी वे बोले कि ये सब राजनीतिक मुकदमें थे और अब सरकार को इन्हें वापस लेना चाहिए. हालांकि इस पर फैसला मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ही लेंगे. वहीं कद के अनुरूप मंत्रालय न मिलने की बात को भी वो ये कहकर टाल गए कि मेरे पास वाले मंत्रालयों में रोजगार के अवसर ज्यादा हैं और मैं इस दिशा में काम कर रहा हूं.

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