अनार फसल का रकबा बढ़ा, बिक्री नहीं होने से अब गिरते जा रहे दाम

खास खबर राजस्थान

Feb 03, 2019, 06:30 AM IST

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ट्रैक्टर टॉलियां भरकर बाजारों में बेचना बनी मजबूरी 

उद्यानिक खेती को बढ़ावा देने में किसानों ने भी हाथ आजमाने शुरू कर दिए। पिछले कुछ वर्षों से जिले के सायला क्षेत्र में भी अनारों के बगीचे तैयार करने में किसानों की रुचित बढ़ी है। जिस कारण धीरे-धीरे उद्यानिकी खेती का रकबा भी बढ़ा है, लेकिन अनार फलों की बिक्री का उचित स्थान नहीं होने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में किसानों को मजबूरी में औने-पौने दामों में ही बिक्री करनी पड़ती है। उल्लेखनीय है कि सायला उपखंड के कई गांवों में किसानों ने अनार के बगीचे तैयार किए हैं। 

मजबूरी में बेचने को विवश : किसानों की माने तो अभी अनार पककर तैयार हो गईं है पर किसानों को पीड़ा यह है कि उनके फलों को सही बाजार नहीं मिल रहा है। इसी कारण किसानों को हाट बाजार में ट्रैक्टर भरकर अनार औने-पौने दाम में बेचने पर विवश होना पड़ रहा है। 

मार्केट का अभाव, बिचौलिए उठा रहे फायदा : ये अनार खेतों से 25 से 40 रुपए किलो बेचना पड़ रहा है। कहीं-कहीं बिचौलिए इसका पूरा लाभ उठा रहे हैं। मांग है कि और सरकार को बेहतर मार्केट उपलब्ध कराने के लिए प्रयास करना चाहिए। 

टिशू कल्चर से तैयार हो रहे पौधे : अधिक उत्पादन लेने के लिए विशेष प्रकार के टिशू कल्चर पौधे किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ये पौधे महाराष्ट्र की कई कंपनियों से बुलवाए गए हैं। वरिष्ठ उद्यानिकी विस्तार ने बताया कि लगभग 18 से 24 माह के मध्य ये पौधे पूरी तरह तैयार होकर फल देने लगते हैं। विभाग के अनुसार एक हैक्टेयर में 80 हजार रुपए का खर्च आता है। 3 वर्ष से 5 वर्ष तक के पौधे में क्रमश: 10 से 40 किलो तक अनार लगते हैं। 

बाहरी क्षेत्रों व्यापारियों का रुझान कम 

यहां दिल्ली, कोलकाता व मुंबई सहित अन्य बड़े शहरों से व्यापारी सीधे अनार खरीदने पहुंचते हैं तो किसानों को भाव ज्यादा मिलते हैं, लेकिन जिले में किसानों का इतना प्रचार नहीं है। जिस कारण यहां के किसानों तक बाहरी व्यापारी भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। 

उचित स्थान का अभाव 

जैविक खेती सहारा देती है 

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